पिछले कुछ समय से दक्षिणी एशिया में चीन केवल विस्तार नीति पर ध्यान रखें हुए है। इसी श्रृंखला में ताजा उदाहरण डोकलाम क्षेत्र में जारी विवाद वैश्विक स्तर पर आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यह आधिकारिक तौर पर भूटान का क्षेत्र है जिस पर चीन की नजरें गड़ी हुई हैं। भारत का मित्र राष्ट्र भूटान लगभग सभी आंतरिक मामलों में सहयोग की अपेक्षा रखता है। भारतीय सेना की मौजूदगी से खफा चीन का उपचार तभी संभव है जब दोनों देश कूटनीतिक बैठक कर हल निकालें। क्योंकि यह इक्कीसवीं सदी है जहाँ बम, बारूद, सेना व लडाई के प्रयोग के बिना कोई भी मामला बातचीत के माध्यम से ही सुलझाया जा सकता है। सुषमा स्वराज द्वारा संसद में दिया गया बयान काफी महत्वपूर्ण है लेकिन जरूरत है कि चीन की गतिविधियों को ध्यान में रखकर कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वार्ता की जाए।
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