Friday, February 28, 2025
Quotes
Friday, January 31, 2025
Tuesday, August 6, 2024
धावक और कठोर परिश्रम!! अफ्रीका और रफ़्तार का संबंध
Sunday, April 7, 2024
शायरी
Monday, March 25, 2024
लघु कथा
कड़ी मेहनत और सब्र का फल
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बात 2019 के जनवरी की है, मेरी मां मिर्ची🌶️ का पौधा ले आई। जिनमें करीब 20 छोटे पौधे शामिल थे। अब उनको गमले और खाली ज़मीन में लगा दिया।
कुछ तो स्वयं सूख गए, कुछ जिंदा रहे, तमाम उपाय किए कभी इस जगह कभी यहां कभी वहां कभी जैविक खाद तो कभी लकड़ी का बुरादा और आज ये फल 🌶️ एक हरी मिर्च, प्रकृति भी अजीब है, दो साल तक सिंचाई और दो साल बाद सिर्फ एक फल, सब्र का फल🤓🙂
जितने यत्न किए प्रयत्न करे उतने ही देरी से निकला यह फल।
निष्कर्ष: सब्र का फल कभी कभी तीखा भी होता है।😂😂
•अतुल दूबे "सूर्य"
•गोरखपुर
स्त्री का प्रेम और संवेदनाएं
Sunday, June 4, 2023
"खो गए हम"
Tuesday, October 19, 2021
बारिश के साथ मछली आसमान से गिरी
गोरखपुर: बारिश के मौसम में पानी और ओले बरसना आम बात है. आपने बारिश के साथ छोटे-छोटे ओले गिरते ही देखे होंगे, लेकिन भदोही जनपद में बारिश के साथ मछली आसमान से गिरी है, जिसे देख लोग अचंभित रह गए. भदोही जनपद के चौरी क्षेत्र के कंधिया के पास सोमवार को तेज हवा के साथ हुई बारिश में आकाश से मछलियां गिरने लगीं.
चौरी इलाके के कंधिया फाटक के पास का यह पूरा मामला है. बारिश के दौरान पानी के साथ जैसे ही मछलियां गिरने लगी इसे देखकर लोग अचंभित रह गए. इस दौरान एक दो नहीं बल्कि सैकड़ों छोटी-छोटी मछलियां बारिश के दौरान गिरी. जिनको कई ग्रामीणों ने एकत्रित भी किया. हालांकि इन मछलियों को ग्रामीणों ने तालाब और आसपास के गड्ढों में फेंक दिया.
मौसम विशेषज्ञों ने कही ये बात ......
गांव के रहने वाले सुखलाल ने बताया कि मछलियों को गिरता देख सभी लोग अचंभित रह गए. हालांकि मछलियों को खाया नहीं गया. जानकारी के मुताबिक ग्रामीणों ने 50 किलो से ज्यादा मछलियों को इकट्ठा कर गड्ढों और तालाब में छोड़ दिया. वहीं मौसम विशेषज्ञों की अगर माने तो उनका कहना है कि कभी-कभी निम्न दबाव क्षेत्र बनने के कारण ऐसा होता है. नदिया ,तालाब के पास बनी चक्रवाती हवा मछलियों को भी उड़ा ले जाती है और आसपास के क्षेत्रों में बारिश के दौरान ऐसा देखने को मिलता है.
Tuesday, June 22, 2021
Indian History - Notes
History
·
European Companies
|
Company |
Established |
Place |
Start of Trade |
|
Portuguese |
1498 |
Kochin |
1503 |
|
Deutsch |
1602 |
Maulipatnam |
1605 |
|
British |
1600 |
Surat |
1608 |
|
Danish |
1616 |
Trankobar |
1620 |
|
French |
1664 |
Surat |
1668 |
· Deutsch people from Netherland or
Holland came to India in search of money and trade opportunities. Deutsch did
the trade of spices by using gold money “Paigoda”. In 1759, they
were defeated by the Britishers in the “War of Bedara”.
· French government established their
company in 1668 in the reign of emperor Louis 14.
· Portuguese – Vasco D Gama was the
first man to reach India through sea route. He reached Calicut in Kerala where
the then King Jamorin welcomed him with royal hospitality.
The first viceroy Portugal was “ Francisco D Almeida”. The real working
viceroy was “ Alphonso D Albukark”. Goa was made as the main trade centre of
the Portuguese Company. The established printing press and
started tobacco production.
· Denmark – Danish people were
interested in the establishment of “Christian Missionaries”. The main centre of
their missionaries was situated at Serampur in Bengal.
· French – The French company was
founded by the emperor of France “Louis 14” through his minister “Coalbirt”.
Pondicherry was their main trade centre and they established “Fort Louis” in
Karnataka. The war of Karnataka fought between British and French.
ब्लैक फंगस
Friday, June 18, 2021
जाम_का_झाम
Monday, May 24, 2021
भारत की पहली सेल्फ रैपिड एंटिजन टेस्ट किट
Saturday, May 22, 2021
प्रकृति क्या है?
प्रकृति क्या है?
_________________________________
वह अद्भुत है, हरियाली शोभा है,
कलिका है, ईश्वर का दर्पण है,🔮🔮
कही किसान का समर्पण, इस जग को अर्पण है,
मदमस्त हवा का झोका है, परिंदों का आकर्षण है,
ये प्रकृति है जनाब!! ईश्वर का दर्पण है 🌹🌹
©•अतुल दूबे "सूर्य"
#प्रकृति #अर्पण #समर्पण #आकर्षण #nature #naturephotography
Sunday, May 9, 2021
गोरखपुर में दिखेगा एक और खूबसूरत नजारा, सारस पक्षी के प्रवास के लिए नयागांव का होगा संरक्षण
Saturday, May 8, 2021
Monday, May 3, 2021
जामुन के औषधीय गुण जो संक्रमण की स्थिति में रामबाण हैं!!!........
Wednesday, April 28, 2021
कोई एक चीज घर में रखकर देखें, पलट जाएगी किस्मत, निखरेगा भविष्य........
Monday, April 26, 2021
योग करें निरोग
योगा अभ्यास की आध्यात्मिक तथा स्वास्थ्य संबंधी उपयोगिता सर्वत्र सिद्ध है। योग से कुछ रोगों की सफल चिकित्सा की जा रही हैं विभिन्न योग संस्थानों में हो रहे शोध कार्यों से लगभग अधिकांश रोगों की चिकित्सा की जा रही है। योग अब चिकित्सा पद्धति के रूप में स्थापित होता जा रहा है।
योग विज्ञान के ऐतिहासिक, दार्शनिक, समाज वैज्ञानिक तथा शैक्षणिक पक्षों पर अनुसंधान किया जाना चाहिए। वैसे तो योग अध्यात्म का विषय है किन्तु इस समय योग विज्ञान के विकास की मुख्य धारा स्वास्थ्य-विज्ञान की दिशा में पहुंच गयी है। मनुष्य की शारीरिक, मानसिक, आध्यात्मिक तथा बौद्धिक अवस्था को स्वास्थ्य कहते हैं। आधुनिक समय में होने वाले अधिकांश रोग मनुष्य तथा उसके पर्यावरण के बीच तालमेल (सामंजस्य) न बन पाने के कारण ही उत्पन्न होते हैं। योगाभ्यास मनुष्य के मनोदैहिक व्यवस्था में तालमेल की क्षमता प्रदान करके उसे तमाम रोगों से बचाता है।
‘योग’ कोई धार्मिक प्रवृत्ति या क्रिया नहीं है। यह वैज्ञानिक साधना पद्धति है। जिसका उद्देश्य मानव का सर्वांगीण विकास है। यह अपने आप में एक गहन दर्शन तथा व्यापक विज्ञान है और इसकी साधना अनुपम कला है। इसके बहुआयामी उद्देश्य हैं। इसलिए इसकी साधना-पद्धति भी बहुआयामी है। भगवद्गीता में ज्ञान कर्म और भक्ति मार्ग से योग-साधना की अवधारणा प्रस्तुत की गयी है।
पतंजलि योगदर्शन में अष्टांग योग साधना का बहुत व्यापक वर्णन है। अष्टांग योग के सभी आठ अंगों का यथा सम्भव समुचित अभ्यास ही सम्यक योग साधना है। अष्टांग योग के प्रथम दो अंग यम और नियम सद्वृत्ति साधना के विषय हैं। ये चित्त तथा शरीर शुद्धि के माध्यम हैं और योगावस्था प्राप्त करने के महत्वपूर्ण मार्ग हैं।
आसन मुख्य रूप से शरीर की साधना है। पतंजलि ने आसन के विषय में लिखा है- ‘स्थिर सुखमासनम्’ अर्थात् आसन उसे कहते हैं, जो साधक के लिए सुखदायी और स्थिरता प्रदान करने वाला हो।
योगाभ्यास स्त्री और पुरुष दोनों लोगों के लिए हैं, परन्तु स्त्रियों को ऋतुकाल तथा गर्भावस्था में योगाभ्यास बंद कर देना चाहिए अथवा केवल चिकित्सक के परामर्श से योग का अभ्यास करें।
बच्चों को 12 वर्ष की आयु के पूर्व शुभंगासन, अर्धशलभासन, धनुरासन, हलासन, पश्चिमोत्तासन तथा योगमुद्रा करनी चाहिए। 12 वर्ष के बाद अन्य और आसन कराये जायें। योगाभ्यास के लिए स्वच्छ, शांत तथा हवादार स्थान आवश्यक है। यौगिक चिकित्सा में आहार-विहार का विशेष महत्व है। योगाभ्यासी को आहार-विहार के नियंत्रण का पालन करना चाहिए। योग शास्त्र में कम भोजन की महत्ता को बल दिया गया है। अस्वस्थ और बीमार लोगों को चिकित्सक के परामर्श बिना योगाभ्यास नहीं करना चाहिए।
अधिकांश रोगों का इलाज ‘योग’ से सम्भव है। योग मानव जाति के उत्थान के लिए है। इससे रोग दूर होते हैं, लेकिन जो निरोगी व्यक्ति योग का अभ्यास करता है, वे तो बीमार नहीं होते।
ऑक्सीजन की कमी क्यों? क्या हवा में सांस लेने योग्य ऑक्सीजन नहीं, जानें विस्तार से.....
कोरोना की दूसरी लहर ने हमारी सभी तैयारियों की कलाई खोलकर रख दी है। अस्पतालों में बेड और दवा तो दूर, मरीजों को ऑक्सीजन भी नहीं मिल रही। हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि सरकार 50 हजार मीट्रिक टन ऑक्सीजन खरीदने के लिए दुनिया के बाजार में खड़ी है। ऐसे में लोगों के मन में तरह-तरह के सवाल उठ रहे हैं कि आखिर हम सब हवा में सांस लेते हैं और वह हमारे चारों ओर मौजूद है...तो क्यों नहीं हम इस हवा को सिलेंडरों में भरकर मरीजों को लगा देते? आखिर अस्पतालों में पाइप से आने वाली ऑक्सीजन यानी मेडिकल ऑक्सीजन है क्या? यह बनती कैसे है? और क्यों इसकी कमी है?
तो आइये जानते हैं ऐसे सभी सवालों के जवाब...
प्र. मेडिकल ऑक्सीजन क्या है?
कानूनी रूप से यह एक आवश्यक दवा है जो 2015 में जारी देश की अति आवश्यक दवाओं की सूची में शामिल है। इसे हेल्थकेयर के तीन लेवल- प्राइमरी, सेकेंडरी और टर्शीयरी के लिए आवश्यक करार दिया गया है। यह WHO की भी आवश्यक दवाओं की लिस्ट में शामिल है।
प्रोडक्ट लेवल पर मेडिकल ऑक्सीजन का मतलब 98% तक शुद्ध ऑक्सीजन होता है, जिसमें नमी, धूल या दूसरी गैस जैसी अशुद्धि न हों।
प्र. हमारे चारों ओर हवा है और हम उसमें ही सांस लेते हैं, ऐसे में उसे ही हम सिलेंडरों में क्यों नहीं भर लेते?
हमारे चारों ओर मौजूद हवा में मात्र 21% ऑक्सीजन होती है। मेडिकल इमरजेंसी में उसका इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। इसलिए मेडिकल ऑक्सीजन को खास वैज्ञानिक तरीके से बड़े-बड़े प्लांट में तैयार किया जाता है। वह भी लिक्विड ऑक्सीजन।
प्र. मेडिकल ऑक्सीजन कैसे बनाई जाती है?
मेडिकल ऑक्सीजन बनाने के तरीके को समझने के लिए पहले कुछ बातों को जानना जरूरी है...
बॉयलिंग पॉइंट
जिस तरह पानी को 0 डिग्री सेल्सियस तक ठंडा करने पर वह जमकर बर्फ या ठोस बन जाता है और 100 डिग्री सेल्सियस तक गर्म करने पर उबलकर भाप यानी गैस में बदल जाता है, ठीक ऐसे ही हमारे आसपास मौजूद ऑक्सीजन, नाइट्रोजन आदि इसलिए गैस हैं क्योंकि वह बेहद कम तापमान पर उबलकर गैस बन चुकी हैं।
ऑक्सीजन -183 डिग्री सेल्सियस पर ही उबलकर गैस में बदल जाती है।
यानी पानी का बॉयलिंग पॉइंट 100 डिग्री सेल्सियस है तो ऑक्सीजन का -183 डिग्री सेल्सियस।
दूसरे शब्दों में कहें तो अगर हम ऑक्सीजन को -183 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा ठंडा कर दें तो वह लिक्विड में बदल जाएगी।
अब बात मेडिकल ऑक्सीजन बनाने के तरीके की...
मेडिकल ऑक्सीजन हमारे चारों ओर मौजूद हवा में से शुद्ध ऑक्सीजन को अलग करके बनाई जाती है।
हमारे आसपास मौजूद हवा में 78% नाइट्रोजन, 21% ऑक्सीजन और बाकी 1% आर्गन, हीलियम, नियोन, क्रिप्टोन, जीनोन जैसी गैस होती हैं।
इन सभी गैसों का बॉयलिंग पॉइंट बेहद कम, लेकिन अलग-अलग होता है।
अगर हम हवा को जमा करके उसे ठंडा करते जाएं तो -108 डिग्री पर जीनोन गैस लिक्विड में बदल जाएगी। ऐसे में हम उसे हवा से अलग कर सकते हैं।
ठीक इसी तरह -153.2 डिग्री पर क्रिप्टोन, -183 ऑक्सीजन और अन्य गैस बारी-बारी से तरल बनती जाएंगी और उन्हें हम अलग-अलग करके लिक्विड फॉर्म में जमा कर लेते हैं।
वायु से गैसों को अलग करने की इस टेक्नीक को हम क्रायोजेनिक टेक्निक फॉर सेपरेशन ऑफ एयर कहते हैं।
इस तरह से तैयार तरल ऑक्सीजन 99.5% तक शुद्ध होती है।
यह पूरी प्रक्रिया बेहद ज्यादा प्रेशर में पूरी की जाती है ताकि गैसों का बॉयलिंग पॉइंट बढ़ जाए। यानी बहुत ज्यादा ठंडा किए बिना ही गैस लिक्विड में बदल जाए।
इस प्रक्रिया से पहले हवा को ठंडा करके उसमें से नमी और फिल्टर के जरिए धूल, तेल और अन्य अशुद्धियों को अलग कर लिया जाता है।
प्र. ऑक्सीजन अस्पतालों तक पहुंचती कैसे है?
मैनुफैक्चरर्स इस लिक्विड ऑक्सीजन को बड़े-बड़े टैंकरों में स्टोर करते हैं। यहां से बेहद ठंडे रहने वाले क्रायोजेनिक टैंकरों से डिस्ट्रीब्यूटर तक भेजते हैं।
डिस्ट्रीब्यूटर इसका प्रेशर कम करके गैस के रूप में अलग-अलग तरह के सिलेंडर में इसे भरते हैं।
यही सिलेंडर सीधे अस्पतालों में या इससे छोटे सप्लायरों तक पहुंचाए जाते हैं।
कुछ बड़े अस्पतालों में अपने छोटे-छोटे ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट हैं।
प्र. अगर हवा से ऑक्सीजन बनती है और इसे सिलेंडरों से मरीजों तक पहुंचाया जा सकता है तो उसकी कमी क्यों है?
- केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल का कहना है कि कोरोना महामारी से पहले भारत में रोज मेडिकल ऑक्सीजन की खपत 1000-1200 मीट्रिक टन थी, यह 15 अप्रैल तक बढ़कर 4,795 मीट्रिक टन हो गई।
- ऑल इंडिया इंडस्ट्रियल गैसेज मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (AIIGMA) के अनुसार 12 अप्रैल तक देश में मेडिकल यूज के लिए रोज 3,842 मीट्रिक टन ऑक्सीजन सप्लाई हो रही थी।
- तेजी से बढ़ी मांग के चलते ऑक्सीजन की सप्लाई में भारी दिक्कत हो रही है।
- पूरे देश में प्लांट से लिक्विड ऑक्सीजन को डिस्ट्रीब्यूटर तक पहुंचाने के लिए केवल 1200 से 1500 क्राइजोनिक टैंकर उपलब्ध हैं।
- यह महामारी की दूसरी लहर से पहले तक के लिए तो पर्याप्त थे, मगर अब 2 लाख मरीज रोज सामने आने से टैंकर कम पड़ रहे हैं।
- डिस्ट्रीब्यूटर के स्तर पर भी लिक्विड ऑक्सीजन को गैस में बदल कर सिलेंडरों में भरने के लिए भी खाली सिलेंडरों की कमी है।
प्र. किसी इंसान को कितनी ऑक्सीजन की जरूरत होती है?
एक वयस्क जब वह कोई काम नहीं कर रहा होता तो उसे सांस लेने के लिए हर मिनट 7 से 8 लीटर हवा की जरूरत होती है। यानी रोज करीब 11,000 लीटर हवा। सांस के जरिए फेफड़ों में जाने वाली हवा में 20% ऑक्सीजन होती है, जबकि छोड़ी जाने वाली सांस में 15% रहती है। यानी सांस के जरिए भीतर जाने वाली हवा का मात्र 5% का इस्तेमाल होता है। यही 5% ऑक्सीजन है जो कार्बन डाइऑक्साइड में बदलती है। यानी एक इंसान को 24 घंटे में करीब 550 लीटर शुद्ध ऑक्सीजन की जरूरत होती है। मेहनत का काम करने या वर्जिश करने पर ज्यादा ऑक्सीजन चाहिए होती है।
प्र. स्वस्थ इंसान एक मिनट में कितनी बार सांस लेता है?
एक स्वस्थ वयस्क एक मिनट में 12 से 20 बार सांस लेता है। हर मिनट 12 से कम या 20 से ज्यादा बार सांस लेना किसी परेशानी की निशानी है।
Best
Quotes
1. Never tell everyone everything. Even with your family. 2. Be mature enough not to take anything personally. Be less reactive. 3. Don'...
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श्री कृष्ण जी और उनके बड़े भाई बलराम अपनी शिक्षा के लिए गुरु गर्ग की अनुशंसा पर सांदीपनि के आश्रम में पहुंचे और कुछ ही दिनों में...
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चीन में हर साल 10,000 कुत्ते मार दिए जाते हैं। यह त्यौहार यूलिन, ग्वांगझू, शहर में हर साल जून की गर्मियों के आखिरी दस दिनों में हर साल दस दि...
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यूनिफॉर्म सिविल कोड है समय की मांग भारत विश्व का सबसे बड़ा गणराज्य है। यहां अनेकों धर्मो के लोग निवास करते हैं। भारत में सबको ...

